Thursday, May 26, 2011

हिट होने के फार्मूले

आज का दिन कुछ ख़ास लग रहा है ,बारिश भी झमाझम हो रही है ,
पुराने सारे कपड़े भींगे हुए हैं , नए कपड़े खरीदने का मन कर रहा है |
सोच रहा हूँ , कुछ नए फैशन के कपड़े खरीदूँ , वैसे कपड़े जो की हिट हो , फिट हो न हो कोई फरक नहीं पड़ने वाला |
बाज़ारों में हिट फैशन की मनो जैसे होड़ सी लगी हुई है, चाहे वो फैशन हो ,चरित्र या व्यक्तित्व | हर कोई खुद को हिट करने में लगा हुआ है |


हमारे देश में हिट होने के फार्मूले के जिस फंडा को अपनाया जा रहा है, वो हमारे संस्कृति के रक्षकों के लिए बढ़िया मुद्दा है. आज कल ये लोग भी शांत हैं. ये बाजारवाद की हवा है या कुछ और, पता नहीं. हम पाते हैं कि हमारे आसपास पर १५ मिनट सेलिब्रिटी बनने के लिए होड़ सी मची है. कई लोगों को छपास की भयंकर बीमारी लगी रहती है. वे इसके लिए रात-दिन मेहनत भी करते रहते हैं. फिर जब अन्ना की बातें होती हैं, तो यहां भी डर लगता है. लोगों को लगता है कि यहां चिल्लाने भर से करप्शन खत्म हो जाएगा. हम कहते हैं कि मानसिक दिवालिएपन को आप जब तक दूर नहीं करेंगे, करप्शन खत्म नहीं होगा. जब तक सेटिंग करने के तमाम टेक्निक इस दुनिया के तथाकथित धुर्त अपनाते रहेंगे, तब तक करप्शन रहेगा. देखिए अन्ना का मूवमेंट भी धीरे-धीरे दम तोड़ देगा. क्योंकि मीडिया के कारण ये भी बस १५ मिनट सेलिब्रिटी ही बने हैं. रोज-रोज की जिंदगी की किचकिच को लेकर कौन जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहा है, कोई नहीं? इसलिए पूनम पांडेय सरीखे लोग इस बात को अपने फेवर में यूज करते हैं. उन्हें इसकी कोई परवाह नहीं कि सोसाइटी में उनकी क्या इमेज होगी. हद तो तब है, जब पूनम पांडेय जी को न्यूज लिस्ट में वेबसाइट पर भी टाप पर रखा जा रहा है.


मामला काफी पेचीदा है. बाजारवाद हावी है. और इस बाजार में जो बिक रहा है, उसे ज्यादा इम्पोर्टेंस मिलता है. इस बाजारवाद को खत्म करो, तभी कुछ बनेगा. 
   - जस्ट चिल्ल

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