Wednesday, May 25, 2011

आसमान से कहो थोडा और ऊँचा हो जाए ...


आसमान से कहो थोडा और ऊँचा हो जाए ...
क्योंकि कि अपनी कश्ती ज़रा तेज है ....
सातवें आसमान पर अपना बसेरा है ...
गिरेंगे भी अगर तो बादलों कि गोद में ही ..
मुश्किलों से कह दो कि थोडा कद बढ़ा लें ...
हमें आदत है कंधें मिलाने कि ...
धोखे से कह दो कि हमें धोखा न दे...
एक बार तो अपने विश्वास को आजमा ले ...
ज़िन्दगी के हम मोहताज नहीं हैं ...
हर पल हमें जी भरकर बुलाता है..
चमकते हैं तेज़ इतने अपने सितारे..
कि सूरज भी हमसे शर्माता है ....
मुस्कुराने से अपना जी नहीं भरता ...
हमें आदत है ठहाके लगाने कि ....
यारों के संग है अपनी ज़िन्दगी ...
हमें फुर्सत नहीं दिल लगाने कि...
सिर्फ दोस्ती करते नहीं हम..
हमें आदत है यारी निभाने कि...
सहारा नहीं लेते हम किनारों से...
हममें आदत है सहारा बन जाने कि....
 ------------ social service u see

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