Wednesday, February 23, 2011

Iyanaat..cont.

'मंजिल' तुम चुनो
रास्ता हम दिखायेंगे,
'खुश ' तुम रहो
खुशियाँ हम बिछायेंगे '
सपने' तुम देखो '
पूरा' हम कराएँगे ,
और
'प्यार' तुम करो'
साथ' हम  निभाएंगे .

iyaanat

तमन्ना जब किसी की नाक़ाम होती है,
जिंदगी उसकी एक उदास शाम होती है .
दिल के साथ दौलत न हो जिस के पास,
मोहब्बत उस गरीब की नीलाम होती है |

Friday, February 11, 2011

"मोहब्बत न करते"

उन्हें ख़त में लिखा था के दिल मुज्तरिब है
जवाब उन्का आया "मोहब्बत न करते" .
तुम्हे दिल लगाने को किसने कहा था ??
बहल जायेगा दिल बहेलते-बहलते   .

भला कोई वादा खिल्फई की हद है
हिसाब अपने दिल मैं लगा के तो देखो
क़यामत का दिन आगया रफ्ता-रफ्ता
मुलाक़ात का दिन गुजरते-गुजेरते .

इरादा था तर्क-ए-मोहब्बत का लेकिन
फरेबे तबस्सुम में फिर आये हम
अभी खा के ठोकर संभल न भी पाए
की फिर खाए ठोकर संभलते -संभलते.
                                              --समर्पित

Tuesday, February 8, 2011

मुझे फ़ना करदे

उसे मेरा या मुझे उसका करदे .
बहुत दुःख सहे हैं मैंने ,
कोई खुसी अब तो मुक़दर करदे .
बहुत मुश्किल लगता है उस से दूर रहना ,
...जुदाई के सफ़र को कम करदे .
जितना दूर चले गए वो हमसे ,
उन्हें उतना करीब करदे .
नहीं लिखा अगर नसीब में उनका नाम ,
तो ख़तम कर ये ज़िन्दगी और मुझे फ़ना करदे .

Monday, February 7, 2011

hum

बेखुदी की ज़िन्दगी  हम जिया नहीं करते ,
यूँ किसी का जाम हम पिया नहीं करते |
उनसे कह दो  मोहब्बत का इज़हार आकर खुद करें,
यूँ किसीका पीछा हम नहीं करते  |

ज़िन्दगी के लम्हे

साँसे तो चल  रही  थी  मगर ज़िन्दगी  न  थी  ,
एक शमा जल रही थी मगर रौशनी ना थी ,
तुम  मिले  तो  जैसे  नई  ज़िन्दगी  मिली ,
जो शमा बुझ रही थी उसे रौशनी मिली .
इसी रौशनी के सहारे ज़िन्दगी बितानी है ,
सांसों की डोर जब तक टूट ना जाएँ  
हर लम्हे को तेरी यादों से सजानी है .

Saturday, February 5, 2011

Khushiyaan

पता  नहीं  क्यों  खुशिया  हमें  रास  नहीं  आती  हैं ,
हम  पीछा  करते  है  इनका  पर  यह हमे  मिल  ना  paati  है ,
शबनम  की  बूंदों  की  तरह  इन  आँखों  से  बह  जाती  हैं  ,
बैठे  दरवाजे  पर  हम  आस  लगाये  रखते  हैं  ,
हर  दस्तक  उसके  आने  का  एहसास  दे  जाती  है  ,
पता  नहीं  ये खुशियाँ  हमें  रास  क्यों  नहीं  आती  है ???

Friday, February 4, 2011

Bachpan vs aaj

बचपन के दुःख कितने अच्छे हुआ  करते थे ,
तब तो  सिर्फ  खिलोने  टूटा  करते  थे ,
वो खुशियाँ भी न जाने  कैसी  खुशिया  थीं ,
तितली  के  पर  नोच  कर  उछला  करते  थे ,
छोटे  थे  तो  मकरों  फरेब  भी  झूठे  थे
दाने  दाल  कर  चिड़िया  पकड़ा  करते  थे ,
अब  तो  एक  आंसू  भी  कर  जाए  रुसवा ,
बचपन  में  जी  भर  कर  रोया  करते  थे ..…

Dhanbad Rocks

Sum Lines 4 DHANBAD:-*...
वो कोयला नगर की शाम .,
वो  बैंक  मोड़ का जाम  .,
गर्मी की चिलचिलाती धुप...
सर्दियों में FRANKY का रोल और 1  is to two soup  
वो  रेलवे  स्टेडियम में  क्रिकेट .,
वो हीरापुर  का  मार्केट .,
वो मधुल्लिका के रसगुल्ले .,
वो Kaveri का Masala Coke.,
वो कोयला का गुरुर .,
वो I.S.M की  नूर .,
वो बिरसा मुंडा पार्क में  
फूलों  का  खिलना 
और  प्रेमियों  का  चुपके  से  मिलना .,
वो  S.S.L.N.T की  सड़के  जहाँ 
कितने  ही दिल धडके .,
वो Office से निकल City Center पर अड्डा  मारना 
और  घर  देर  से  Jana .
ऐसे  ही  है हमारी DHANBAD  की यादें   .
"EVERYONE SHOCKS DHANBAD ROCKS"

Thursday, February 3, 2011

Written by one of my verry good frnds

.....जब सच कहीं निकलता होगा !

आँखे फट जाती होंगी जब सच कहीं निकलता होगा,,
झूठा होगा वो शख्स जो आँखे चुरा के चलता होगा.

तल्ख़ है चेहरा तेरा, आँखे बनी हैं यूँ अंगार क्यूँ ?
भट्ठी झूठ की हो तो सच इसी कदर जलता होगा.

कई हादसों की चश्मदीद, ये सड़क झूठी होगी जरूर,,
देखो यहीं-कहीं कोने में पड़ा हुआ सच गलता होगा.

इन लड़खड़ाते क़दमों से कहाँ तक जाओगे? देखो उसे,,
वो ऊँचा चढ़ा है, यक़ीनन गिर-गिर के संभलता होगा.

इतराता था बड़ा अपने हर एक झूठ पे वो लोगों,,
सच की नज़र ऐसी पड़ी, अब सिर्फ हाथ मलता होगा.....