Wednesday, May 18, 2011

"दोस्ती"




अजीब दास्ताँ  होती  है  "दोस्ती"  की ,
लड़ना  मिलने  से  भी अच्छा  लगता  है ..

लड़  के  मानाने  वाले  भी  होते  है ,
किसी को  चिढाना  अच्छा  लगता  है ..

दोस्त  के  मुंह  से  कुछ  सुनने  के  लिए ,
कभी  झुक  जाना  अच्छा  लगता  है ..

सफ़र  ट्रेन  का  हो  या  ज़िन्दग i का ,
ख़तम  नहीं  बाते  फिर  भी  खामोश  रह  कर
मुस्कुराना  अच्छा  लगता  है …

दोस्तों  में  ही  लगता  है  मिल  गई  पूरी  दुनिया ,
बाक़ी  सब  भूल  जाना  अच्छा  लगता  है ,

दोस्तों  तुम  हमेशा  साथ  रहना  
तुम्हारा याराना  अच्छा  लगता  है ..

                 --- We are just friends na ?????  

No comments:

Post a Comment