पता नहीं क्यों खुशिया हमें रास नहीं आती हैं ,
हम पीछा करते है इनका पर यह हमे मिल ना paati है ,
शबनम की बूंदों की तरह इन आँखों से बह जाती हैं ,
बैठे दरवाजे पर हम आस लगाये रखते हैं ,
हर दस्तक उसके आने का एहसास दे जाती है ,
पता नहीं ये खुशियाँ हमें रास क्यों नहीं आती है ???
हम पीछा करते है इनका पर यह हमे मिल ना paati है ,
शबनम की बूंदों की तरह इन आँखों से बह जाती हैं ,
बैठे दरवाजे पर हम आस लगाये रखते हैं ,
हर दस्तक उसके आने का एहसास दे जाती है ,
पता नहीं ये खुशियाँ हमें रास क्यों नहीं आती है ???
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