Friday, February 4, 2011

Bachpan vs aaj

बचपन के दुःख कितने अच्छे हुआ  करते थे ,
तब तो  सिर्फ  खिलोने  टूटा  करते  थे ,
वो खुशियाँ भी न जाने  कैसी  खुशिया  थीं ,
तितली  के  पर  नोच  कर  उछला  करते  थे ,
छोटे  थे  तो  मकरों  फरेब  भी  झूठे  थे
दाने  दाल  कर  चिड़िया  पकड़ा  करते  थे ,
अब  तो  एक  आंसू  भी  कर  जाए  रुसवा ,
बचपन  में  जी  भर  कर  रोया  करते  थे ..…

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